श्रीमद् भागवत वियोग, गीता योग और रामचरितमानस योग शास्त्र है- अशोक भाई

भीलवाड़ा समाचार 
आकोला (रमेश चन्द डाड) पुरुषोत्तम मास के पवित्र पवन मास में अमरकंटक (मध्य प्रदेश) स्थित शांति कुटी में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन महाराज अशोक भाई ने बताया कि कथा मां स्वरूपी है, मन में तीनों देव समाहित है विष्णु, ब्रह्मा, महेश !  मन में ही कथा समीक्षा, पोषण, पालन, कल्याण करने वाली है ! श्रीमद् भागवत वियोग शास्त्र है, गीता योग शास्त्र, रामचरितमानस प्रयोग शास्त्र है ! भा- प्रकाश, ग - ज्ञान, व-वैराग्य होना, त -त्याग का होना, यह भागवत का विस्तार स्वरूप है !भागवत सबसे पहले आदि नारायण ने ब्रह्मा जी को सुनाई भागवत ही भगवान का वाग्मय स्वरूप है !  काम, क्रोध, मोह, लोभ के कारण ही संसार में भय, भ्रष्टाचार व्याप्त है ! जब तक राम नाम का जाप, सत्संग नही करेंगे तब तक परमात्मा को प्राप्त नहीं किया जा सकता! 
 परमात्मा की प्राप्ति तभी संभव हैं जब सांसारिक मोहमाया के बंधन से मानव मुक्त होकर प्रभु भक्ति, भागवत की स्तुति, सत्संग को अपनाये तब ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है !
कथा व्यास अशोक भाई ने सत्संग कीर्तन व भागवत के महत्व को समझाते हुए मानव कल्याण, गौ सेवा, नर सेवा, नारायण सेवा पर जोर देकर अपने दैनिक जीवन में सत्संग कीर्तन को शामिल करने की बात कही! कथा श्रवण में भँवर लाल सुवालका, योगेश पारीक, ओमप्रकाश काबरा, कैलाश लढ़ा, कैलाश टेलर, बरदी चन्द दरगड, सुनील लोढ़ा, गोपाल लक्षकार,  सीमा पोरवाल, मधुबाला, उगम देवी, रेखा देवी, आशा देवी सहित बड़ी मात्रा में महिला शक्ति भी मौजूद थीं